Micropoetry#80

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घर घर में कैद हैं…

घर घर में कैद हैंमाँ की बेताबियाँ अनेक हैंबाबा की तन्हाईयाँ ढेर हैंदीदी के सपने सरफ़रोश हैं…*घर घर में कैद हैंख्वाहिशें बेचैन हैंदिल में रंजिशें खामोश हैंआपसी शिकवे हर रोज़ हैं…*घर घर में कैद हैंहसरतें बेख़ौफ़ हैंमनमर्ज़ियों का शोर हैबगावतों का शहर है…

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Micropoetry#78

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कुछ हिस्से उन मुलाकातों के…

कुछ हिस्से उन मुलाकातों केवो पीछे छोड़ गए थेउन्हें मैंने अलमारी मेंसंजोकर रखा हैजब किसी रातउनकी कमी खलती हैऔर यादें छेड़तीं हैंउन्ही टुकड़ो कोपलंग पर बिखेर देती हूँकभी उनमें उनकीझलक ढूंढती हूँतो कभीउन खामोशियों की चादर सेकुछ अधूरी हसरतों कोढांक देती हूँ

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निगाहों में जिनकी हम…

ग़म तो जनाबइस बात का है कीनिगाहों में जिनकी हमताउम्र रहना चाहते थेउन्हें नज़रों से गिरने मेंज़्यादा वक़्त न लगाहम सपने बुनते रह गएऔर वो दबे पाओं दग़ा दे गए

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जो दास्ताँ…

जो दास्ताँ जुबां पर हैवह उन्हें बताते कैसेकहते भी तो क्यावो अपनाते उन्हेंगैरों के बीच जोरातें काटी हमनेउनके चौखट परअजनबी का दर्जान गवारा था हमेंज़िन्दगी बीत गयीदो पल की दिल्लगीके आस मेंऔर जो दास्ताँ जुबां पर थीबरसों हुए उन्हें भुलाये हमें

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Micropoetry#72

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दिलासा

शाम को जबपंछी घर लौटेउन्हें देख दिल कोछोटी सी ख़ुशी महसूस हुईमेरा आंगन न सहीकिसीकी तो बग़ियाआज रोशन हुई

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Micropoetry#69

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Micropoetry#68

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ऐ जिंदगी…

पल दो पल ठहरकर कभी हमें भी तो देख जिंदगी तेरी मीठी शरारतों में घुलना बाकी है अभी… पल दो पल पलटकर कभी हमें भी तो देख जिंदगी तेरी नमकीन मस्तियों को चखना बाकी है अभी… पल दो पल मुस्कुराकर कभी हमें भी तो देख जिंदगी तेरी हसीन मधोशियों में बिखरना बाकी है अभी…

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Scars, like Stars…

she hides them but they peek anyway she paints them but they peel away she looks at them hard when she’s alone she relives those stories that have long gone she distances herself from the world so piercing she worries she’ll be judged reduced to mockery she aches to be sans them she longs to…

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आज रात फिर …

आज रात फिरदरवाजे परतुम्हारी यादोंने दस्तक दीघंटों वे ठहरे रहेकी कब हम उन्हेंभीतर लें, बतियाएंसारी रातचारपाई से लिपटेहमने उन्हें अनसूना कियासारी उम्रइन यादों नेआंखें नम ही तो की हैं

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कभी तो ऐसा हो …

कभी तो ऐसा होमैं कुछ न कहूँऔर तुम सुन लोमैं नज़रें चुराऊँऔर तुम देख लोमैं उम्मीदें छुपाऊँऔर तुम जान लोमैं हसरतें मिटाऊंऔर तुम पढ़ लोकभी तो ऐसा होमैं खुदको रोकूंऔर तुम पहचान लोमैं कतरा बिखरुंऔर तुम थाम लो

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You were my drug…

you were my drug the one I was bare without the one I couldn’t stop craving and even though I knew you were drowning me I held on to you like a ship does for anchor you were my drug the one I couldn’t live without the one couldn’t breathe without and even though you…

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